उजाला

दिन का उजाला अभी बाकी है
देर तक रहेगा भरोसा रख
तू क्यूँ, छायी हुई बदली
को रात समझ बैठा है
जरा समय को गुजरने तो दे

बस कुछ देर और
एक इंद्रधनुष आएगा
पूरब से पश्चिम तक, अपनी छटा बिखराएगा
थोड़ा इंतज़ार, क्या तू कर पाएगा?

रात ढल जाने के वहम मे
पंछी भी पेड़ों पर सो गए हैं
तो तुझे भ्रम क्यूँ ना हो
पर कलरव देखना, बस है कुछ ही देर दूर

बादल छटने वाले हैं ये
पीछे सूरज लालिमा लिए बैठे तक रहा है
अपनी छटा बिखराने को
तेरे चेहरे पर पड़ी किरणों से
उसे रंगी बनाने को

शाम शर्तिया उल्लास भरी होगी
उसके बाद ही तो रात होगी
यूँ मायूस ना हो
ये शाम नहीं है
बदली छायी हुई दोपहर भर है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.