ऐ पलट के तो देख मुझे

मुखड़ा….

मत कर तू इतना सितम
एक नज़र भी ना डालो तुम
बोलूँ शाम सवेरे तुझे
ऐ पलट के तो देख मुझे

पहला अन्तरा….

तू थोड़ा इतराई
क्यूँ थोड़ा मुस्कराई
फिर नज़रें घुमाई
कहाँ नज़रें मिलाई
ए पलट के तो देख मुझे

मुखड़ा…..

मत कर तू इतना सितम
एक नज़र भी ना डालो तुम
बोलूँ शाम सवेरे तुझे
ऐ पलट के तो देख मुझे

दूसरा अन्तरा…

मत कर तू मुझे मजबूर
की मैं बंदूक चला दूँ
गोली सीने के हो पार
प्यार का लहू दिखा दूँ
ए पलट के तो देख मुझे

मुखड़ा….

मत कर तू इतना सितम
एक नज़र भी ना डालो तुम
बोलूँ शाम सवेरे तुझे
ऐ पलट के तो देख मुझे

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