चराग ए इश्क़

चराग ए इश्क़ जब जब जले हैं
वो आफताब, खुदा का एक नायाब तोहफा है
दिल बुझ जाते हैं उनके अंधेरों में जो रहे
जहां ये रोशनी दरवाजों से लौट गयी

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