दो बूंद

खता हमसे सिर्फ दो बूंदों की हुई
दो बूंद तब उनकी आंखो से झर रहे थे
जिन्हे हम ने देखा, पर महसूस न किया
घर जाते साकी से हम, दो बूंद, जो मांग रहे थे

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