मृगनयनी

मृगनयनी तो सिर्फ एक नाम है
तेरे नयन तो मदहोशी भरा एक जाम है
माथे की बिंदिया क्या खूब मुस्कुराती है
इस शायर की बेसब्र कलम खुलवाती है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.