रैना बरसे इस सावन मे

रैना बरसे इस सावन मे
काहे बरसाऊं मोती ए मीत

अबके सावन लाए उजियारा
घनघोर घटा के बीच

रैना बरसे इस सावन मे
काहे बरसाऊं मोती ए मीत

पागल मनुआ किरणें देखे
नैनन मोती अब हैं चमके

हीरों की खुल गई सीप रे
मनुआ को मिल गया धीर

रैना बरसे इस सावन में
काहे बरसाऊं मोती ए मीत

लट सुलझाऊं, कुछ आग लगाऊँ
रूत बोले, कुछ ऐसा बोले

सजनवा राह में मीत
तो काहे को मन करूँ अधीर

रैना बरसे इस सावन में
काहे बरसाऊं मोती ए मीत

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