अकस्मात मुलाकात

अकस्मात मुलाकात हो गई उनसे
भूली हुई वो यादें निखर गईं
यादों को टटोल, सहला के जो संवारा
मुद्दतों बाद फिर मुहब्बत खिल गई


देख रे इंसान,

देख रे इंसान, तूने महल बना लिए हैं ऊंचे
जहां अब सांस लेने को हवा भी ना पहुंचे


ऐ पलट के तो देख मुझे

मुखड़ा….

मत कर तू इतना सितम
एक नज़र भी ना डालो तुम
बोलूँ शाम सवेरे तुझे
ऐ पलट के तो देख मुझे

पहला अन्तरा….

तू थोड़ा इतराई
क्यूँ थोड़ा मुस्कराई
फिर नज़रें घुमाई
कहाँ Continue Reading ऐ पलट के तो देख मुझे


वजूद

वजूद

बुलंद पत्थरों की ऊंची हवेली रही होगी
सिमटे हुए ईंट पत्थर आज भी अनछुए है
पर वक़्त आने का इंतजार रखते हैं
एक दिन सबका वजूद अस्त होना Continue Reading वजूद


आज क्या लिखूं

आज क्या लिखूं

आज क्या लिखूं
तुम्हारी शर्मो हया, या बेवफ़ाई
बस जी लूंगा चैन से
कागज़ कोरा ही छोड़ के


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