गुरूर

गुरूर

समंदर के गुरूर को भी देखा है
कोमल प्रेम भरे रेतों के घरों से बस खेल पाता है
हर गुरूर का दायरा सीमित होता है
अपने दायरे के Continue Reading गुरूर


किस पर उडेलूं ये प्यार

किस पर उडेलूं ये प्यार

किस पर उडेलूं ये प्यार,
उसने पिया नहीं तो छलक जाएगा,
जाया हो जाएगा, बिखर जाएगा.
पर बरसना तो जरूरी है यार


साकी

साकी

रोशनी हो ना सकी रे साकी
तेरे मयखाने मे घोर अंधेरा था
इस दरवाजे के बाहर निकल के देखा
दिन तो दिन, रातें भी चाँद से रोशन है


जनाजा

जनाजा

आईने में जवानी को ढलते देखा है
इश्क की चाहत के गम में डूबे हुए
दिल के जनाजे को अक्सर
आंसू भरी खुली आँखों से
निकलते हुए देखा है


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