गुलाब का हश्र

मैंने एक गुलाब भेजा उसको
गुलाब की तस्वीर मात्र थी
गुलाब को ना फेंक सका
दोस्त को दिया, कहकर की तू भी भेज
गुलाब किसी चाहने वाले ने उठाया
क्यूंकि Continue Reading गुलाब का हश्र


चौराहे

ये जो मन भटका हुआ है,
दोराहे पे जा खड़ा है
रस्ता नहीं माकूल,
मंज़िल नहीं मालूम….

चलते हुए इन राहों पर,
कई मुस्कान आए,
कई मंज़र बिखेरे..
कुछ अच्छे थे,
मनमोहक थे,
उन्हें Continue Reading चौराहे


रोटी

(इमारत के दरबान की जुबानी)

साहिब उतरा कार से
कूड़े दान से सट कुत्ता सो रहा था
किसी ने ना देखा गौर से
भूख से हताश, बेहोश हो रहा Continue Reading रोटी


दीदार है बाकी

दीदार है बाकी

मायूस ना हो क्यूंकि दीदार है बाकी अभी
वक़्त सिल देगा उधडे हुए सपनो को अब


शराफत के बाज़ार

शराफत के बाज़ार

शराफत के बाज़ार, अब नहीं लगते
जो बचे हैं उनमे सिर्फ फरेब बिकता है
पहली सी सादगी अब नहीं दिखती
नाउम्मीद इंसान सहमा सा दिखता है


उजाला

दिन का उजाला अभी बाकी है
देर तक रहेगा भरोसा रख
तू क्यूँ, छायी हुई बदली
को रात समझ बैठा है
जरा समय को गुजरने तो दे

बस कुछ देर Continue Reading उजाला


दीदार

दीदार

दोपहर की धूप थी
छत पे जा,
दीवार के कोने तक पहुंचने के लिए
पैरों के तलवों को जला डाला

दर्द वो इश्क़ का था
समय उसके घर लौटने का Continue Reading दीदार


ना फेरो नज़रें

ना फेरो नज़रें

ना फेरो नज़रें हम से तुम
जुल्फें भी तो मुड़ जाती हैं
चेहरा भी हो जाता है ओझल
सिर्फ मुस्कान ही नहीं जाती है


तेरे आने की राह

तेरे आने की राह

तेरे आने की राह को नज़रें बेबसी से तकती थीं
ना मालूम था तुमने रास्ते बदल लिए थे


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